**इंदौर/अलीराजपुर:**
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की इंदौर सब ज़ोनल ऑफिस की टीम ने एक बड़े सरकारी फंड घोटाले का पर्दाफाश करते हुए **कमल राठौर** को गिरफ्तार कर लिया है। कमल राठौर इस पूरे अपराध का मुख्य साज़िशकर्ता बताया जा रहा है, जिसने कथित तौर पर करोड़ों रुपये सरकारी कोष से ग़बन कर निजी खातों में ट्रांसफर किए।
यह कार्रवाई **ब्लॉक एजुकेशन ऑफिस (BEO), कथ्थीवाड़ा, जिला अलीराजपुर** के खजाने से अवैध भुगतान और फर्जी बिल पास कर सरकारी फंड की हेराफेरी के मामले में की गई है।
**🔍 जांच कैसे शुरू हुई?**
ED ने यह जांच कट्ठीवाड़ा थाने, जिला अलीराजपुर में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की। इसके बाद पुलिस ने IPC, IT Act 2000 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत चार्जशीट भी दाखिल की। शुरुआती जांच में सामने आया कि **अप्रैल 2018 से जुलाई 2023** के बीच **₹20,36,34,988/-** के संदिग्ध और फर्जी भुगतान किए गए।
**📌 जांच में अब तक क्या सामने आया:**
* **कुल ग़बन की राशि:** ₹20,47,12,727/-
* हेराफेरी के मद: वेतन, GIS, पेंशन, छात्रवृत्ति
* तरीका: फर्जी बिल तैयार कर, **Integrated Financial Management System (IFMS)** के साथ छेड़छाड़ कर फंड निजी खातों में ट्रांसफर
* सिर्फ कमल राठौर के नेटवर्क के खातों में **₹14.5 करोड़** पहुंचे
* कुल **57 बैंक अकाउंट** इस्तेमाल हुए — कमल राठौर, उसके परिवार, दोस्तों और सहयोगियों के नाम पर
* पहले भी PMLA की धारा 17 के तहत तलाशी और जब्ती की कार्रवाई हो चुकी है
**⚖️ अगला कदम:**
ED ने कमल राठौर को हिरासत में लेकर मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत पूछताछ शुरू कर दी है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि बाकी रकम कहां और किन चैनलों से भेजी गई।
**🗣️ यह मामला क्यों अहम है?**
यह घोटाला न केवल सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने वाला है, बल्कि यह सरकारी सिस्टम के डिजिटल प्लेटफॉर्म IFMS की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है।
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*घोटाला कैसे शुरू हुआ*
### **1️⃣ शुरुआत — अप्रैल 2018 से खेल शुरू**
मध्य प्रदेश के **जिला अलीराजपुर के ब्लॉक एजुकेशन ऑफिस (BEO), कथ्थीवाड़ा** में अप्रैल 2018 से धीरे-धीरे एक बड़ा घोटाला शुरू हुआ।
यह दफ्तर मुख्य रूप से **शिक्षकों के वेतन, पेंशन, छात्रवृत्ति, GIS (ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम)** जैसी सरकारी योजनाओं के फंड का संचालन करता था।
यहां **कमल राठौर** और उसके साथियों ने सरकारी कोष से पैसे निकालने की साज़िश रची।
तरीका बेहद चालाक था — **फर्जी बिल बनाना और Integrated Financial Management System (IFMS)** में गड़बड़ी करके पेमेंट सीधे अपने और करीबी लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर देना।
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### **2️⃣ धीरे-धीरे करोड़ों का गबन**
अगले 5 सालों (अप्रैल 2018 से जुलाई 2023) में यह हेराफेरी **20 करोड़ से भी ज्यादा** तक पहुंच गई।
* **कुल ग़बन:** ₹20,47,12,727/-
* **मुख्य हेड:** वेतन, GIS, पेंशन, छात्रवृत्ति
* **तरीका:** फर्जी बिल + सिस्टम में हेरफेर + सीधा बैंक ट्रांसफर
कमल राठौर ने सिर्फ अपने नाम, परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के नाम पर **57 बैंक अकाउंट** इस्तेमाल किए, जिनमें लगभग **₹14.5 करोड़** डाल दिए गए। बाकी रकम भी विभिन्न चैनलों में बंटाई गई।
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### **3️⃣ मामला कैसे खुला**
धीरे-धीरे सरकारी खजाने के रिकॉर्ड में अनियमितताएं सामने आने लगीं। कुछ पेमेंट एंट्रीज़ संदिग्ध लगीं और जब मिलान किया गया, तो पाया गया कि बिल असली नहीं थे।
इसके बाद **कथ्थीवाड़ा पुलिस स्टेशन, अलीराजपुर** में FIR दर्ज हुई।
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### **4️⃣ पुलिस और ED की एंट्री**
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने IPC, IT Act 2000 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत **चार्जशीट** दाखिल की।
पुलिस की रिपोर्ट पर **प्रवर्तन निदेशालय (ED)** ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
ED ने पाया कि यह केवल घोटाला ही नहीं, बल्कि **PMLA, 2002 (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम)** के तहत भी अपराध है।



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