आलिराजपुर में सरकारी गाड़ियों पर कंट्रोल, कलेक्टर नीतू माथुर का बड़ा प्रशासनिक फैसला

आलिराजपुर से तुषार राठौड़ की रिपोर्ट ✍️

आलिराजपुर - ईंधन बचत और सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील और मुख्यमंत्री Mohan Yadav के कारकेड में वाहनों की संख्या कम करने जैसे प्रयासों से प्रेरित होकर जिले में डीजल-पेट्रोल की खपत सीमित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

                                                                  कलेक्टर नीतू माथुर 

जिला कलेक्टर नीतू माथुर ने स्पष्ट किया गया है कि अब अधिकारी अनावश्यक रूप से सरकारी वाहनों का उपयोग नहीं करेंगे। फील्ड विजिट के दौरान अधिकारियों को “पूल वाहन व्यवस्था” अपनानी होगी, यानी कई अधिकारी एक ही वाहन से दौरा करेंगे। साथ ही बार-बार अनावश्यक आवागमन पर भी रोक लगाने की कोशिश की जाएगी।

 वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा प्रशासन ने यह भी तय किया है कि जहां तक संभव हो, बैठकें वर्चुअल माध्यम से आयोजित की जाएंगी। अधिकारियों को केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही मुख्यालय बुलाया जाएगा। इसके अलावा मीटिंग्स में अनावश्यक अधिकारियों की मौजूदगी कम करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकारी फाइलों की होगी ई-ऑफिस से आवाजाही जिला प्रशासन ने ई-ऑफिस और ईमेल के उपयोग को बढ़ावा देने का भी निर्णय लिया है। अब अधिकतर फाइलें डिजिटल माध्यम से भेजी जाएंगी, ताकि फाइलों को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक पहुंचाने में वाहनों का अनावश्यक उपयोग न हो।

 सोमवार की टीएल बैठक अब मंगलवार को प्रशासन ने अपनी पारंपरिक सोमवार की टीएल बैठक को मंगलवार के लिए शिफ्ट कर दिया है। पहले सोमवार को टीएल बैठक और जनसुनवाई के लिए सभी अधिकारियों को अलग-अलग बार मुख्यालय आना पड़ता था। अब दोनों कार्यों को एक साथ समन्वित कर अधिकारियों की यात्रा कम करने की योजना बनाई गई है।

 तहसीलदार, एसडीएम और सीडीपीओ रहेंगे वर्चुअल मोड पर फील्ड स्तर के अधिकारियों जैसे तहसीलदार, एसडीएम और सीडीपीओ को फिलहाल फिजिकली उपस्थित न होने के निर्देश दिए गए हैं। ये अधिकारी अब वर्चुअल माध्यम से बैठकों में शामिल होंगे और केवल विशेष आवश्यकता पड़ने पर ही मुख्यालय बुलाए जाएंगे।

 वाहन मेंटेनेंस पर भी जोर प्रशासन ने सरकारी वाहनों की नियमित सर्विसिंग और बेहतर रखरखाव के निर्देश भी दिए हैं, ताकि खराब स्थिति के कारण ईंधन की अतिरिक्त खपत न हो।

प्रशासन का संदेश जिला प्रशासन का कहना है कि यह पहल केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सरकारी खर्च में कटौती और कार्यप्रणाली को अधिक आधुनिक एवं प्रभावी बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

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