**आलीराजपुर की बदहाल शिक्षा व्यवस्था पर उठी आवाज, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सौंपा ज्ञापन**
**आलीराजपुर, मध्यप्रदेश** — देश के सर्वाधिक पिछड़े जिलों में गिने जाने वाला आदिवासी बाहुल्य जिला आलीराजपुर एक बार फिर अपनी बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। यहां की शालाएं व आंगनवाड़ियां जर्जर हालत में हैं, कई स्थानों पर भवन तक नहीं हैं और झोपड़ी या किराए के मकानों में स्कूल संचालित किए जा रहे हैं।
बारिश का मौसम करीब है और नया शैक्षणिक सत्र भी प्रारंभ होने वाला है, लेकिन इन शिक्षण संस्थानों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। ऐसे में सामाजिक कार्यकर्ता नितेश अलावा और उनके साथियों ने जिलेभर की जर्जर स्कूलों और आंगनवाड़ियों की स्थिति का सर्वे कर फोटो व वीडियो के माध्यम से एक विस्तृत सूची तैयार की है।
इस सर्वे में लगभग 100 स्कूलों और आंगनवाड़ियों की हालत बेहद खराब पाई गई, जहां बच्चों का बैठना मुश्किल हो गया है। बारिश के दौरान छतों से पानी टपकता है, सरिए बाहर निकल आए हैं और कई जगह भवन गिरने की कगार पर हैं, जिससे बच्चों की जान को गंभीर खतरा बना रहता है।
इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सोमवार को कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधिमंडल जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बारिश पूर्व इन सभी स्कूलों की मरम्मत कराने और जिन भवनों की स्वीकृति मिल चुकी है, वहां तत्काल निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की गई।
सामाजिक कार्यकर्ता नितेश अलावा ने बताया कि वे पिछले 3-4 वर्षों से लगातार विभाग को इन समस्याओं से अवगत करा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनकी चिंता यह है कि यदि तत्काल मरम्मत कार्य नहीं हुआ तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है, जिससे बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जिले के कई स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है, जबकि कई जगह शौचालय तक उपलब्ध नहीं हैं। इस लापरवाही का सीधा असर दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों पर पड़ रहा है, जो शिक्षा से लगातार वंचित हो रहे हैं। वहीं, शहरवासी अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेज रहे हैं।
ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तपिश पांडे को सौंपा गया, जिसमें यह मांग की गई कि शिक्षा विभाग के उन अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए जो लापरवाही बरत रहे हैं।
इस अवसर पर आशा कार्यकर्ताओं ने भी अपनी समस्याएं सामने रखीं और विगत तीन माह से प्रोत्साहन राशि न मिलने की शिकायत की। उन्होंने मांग की कि यह राशि जल्द से जल्द प्रदान की जाए।
ज्ञापन सौंपने वालों में आदिवासी समाज जिला आयोजन समिति के जिलाध्यक्ष मालसिंह तोमर, तरुण मंडलोई, सुमसिंह रावत, धनसिंह कनेश (मजदूर संघ जिला पदाधिकारी), मंजुला लोहार (जिलाध्यक्ष), माया बामनिया, सुरेश सेमलिया, प्रणव बघेल, अजमेर भींडे, सालम सोलंकी, विजय बामनिया और विक्रम चौहान सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



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